नीलकमल सिंह के सैड सॉन्ग्स क्यों नहीं चल रहे?
कॉपी-पेस्ट कंटेंट, ट्रेंड और करियर पर गहराई से नज़र भोजपुरी म्यूज़िक इंडस्ट्री में नीलकमल सिंह वह नाम हैं।
जिन्होंने 2015 से 2019 तक अपनी दर्दभरी आवाज़ और दिल छू लेने वाले गीतों से करोड़ों लोगों के दिलों में जगह बनाई।
उस दौर में उनके गानों ने यूट्यूब पर रिकॉर्डतोड़ व्यूज़ हासिल किए और नीलकमल “भोजपुरी सैड सॉन्ग्स के किंग” बन गए।
लेकिन 2020 के बाद से उनके सैड गाने उतने लोकप्रिय नहीं हो पा रहे।
आखिर ऐसा क्यों हुआ?
इस सवाल का जवाब हमें गहराई से समझना होगा।
1. बार-बार रिपीट होने वाले बोल और कंटेंट की कमी नीलकमल सिंह के शुरुआती गानों में एक सच्चाई और इमोशन था, जिसे दर्शक सीधे-सीधे महसूस करते थे।
लेकिन जैसे-जैसे समय गुज़रा, उनके गानों में लिरिक्स का दोहराव बढ़ने लगा।
कई गानों में राइटर आशुतोष तिवारी की लिखी पंक्तियाँ बार-बार सुनने को मिलीं।अलग-अलग गानों में एक जैसी कहानियाँ और भावनाएँ दिखाई दीं।
श्रोता धीरे-धीरे बोर होने लगे और नएपन की कमी साफ झलकने लगी।
भोजपुरी इंडस्ट्री की यह सबसे बड़ी समस्या है – “कॉपी-पेस्ट कंटेंट”।
जब दर्शकों को नया स्वाद नहीं मिलता, तो वे दूसरे कलाकारों की ओर खिंचने लगते हैं।
2. दर्शकों का बदलता टेस्ट और ट्रेंडसमय के साथ हर इंडस्ट्री में दर्शकों का स्वाद बदलता है।
पहले दर्शक घंटों तक बैठकर दर्दभरे गीत सुनते थे, लेकिन अब का दौर डिजिटल है।
रील्स और शॉर्ट वीडियो कल्चर ने दर्शकों की पसंद बदल दी।छोटे, कैची और डांसिंग नंबर ज्यादा वायरल हो रहे हैं।
आज की जनरेशन “30 सेकंड हुक लाइन” पर नाचना चाहती है, ना कि लंबे-लंबे दर्दभरे गीतों पर।
यानी दर्शकों का मूड अब एंटरटेनमेंट और फास्ट म्यूज़िक की ओर शिफ्ट हो चुका है। इसी बदलाव की वजह से नीलकमल सिंह के सैड गाने पीछे छूट गए।
3. डिजिटल मार्केटिंग और प्रेजेंटेशन की कमजोरी 2020 के बाद भोजपुरी इंडस्ट्री में कई नए सिंगर्स और प्रोड्यूसर्स आए, जिन्होंने सोशल मीडिया को बखूबी इस्तेमाल किया।
उन्होंने गानों को रिलीज़ करने से पहले टीज़र्स और पोस्टर्स से हाइप बनाई।
रील्स क्रिएटर्स को गाने प्रमोट करने के लिए जोड़ा।ट्रेंडिंग हैशटैग और चैलेंजेस चलाकर गानों को वायरल किया।
दूसरी तरफ, नीलकमल सिंह की टीम ने सैड सॉन्ग्स के लिए उतना आक्रामक डिजिटल प्रमोशन नहीं किया।
नतीजा यह हुआ कि गाने रिलीज़ तो हुए, लेकिन सही तरह से दर्शकों तक नहीं पहुँच पाए।
4. करियर पर सीधा असर नीलकमल सिंह आज भी भोजपुरी म्यूज़िक के बड़े कलाकार हैं। उनके रोमांटिक और डांस सॉन्ग्स यूट्यूब पर आज भी मिलियन व्यूज़ लाते हैं।
लेकिन सैड सॉन्ग्स की जो पकड़ उनके करियर में कभी सबसे मजबूत थी, वह अब कमजोर हो चुकी है।
इसका असर उनके करियर पर भी दिखा है :
उनकी “सैड सॉन्ग्स के किंग” वाली पहचान फीकी पड़ गई।इंडस्ट्री में नए सिंगर्स और राइटर्स को जगह मिल गई।
फैंस के बीच उनकी वही पुरानी इमोशनल कनेक्टिविटी नहीं दिखती।
5. नीलकमल सिंह के लिए आगे का रास्तासंगीत की दुनिया में गिरावट हमेशा स्थायी नहीं होती।
अगर सही कदम उठाए जाएँ, तो नीलकमल सिंह फिर से अपने सैड गानों का जादू लौटा सकते हैं।
इसके लिए उन्हें कुछ बातों पर फोकस करना होगा :
1. नए और क्रिएटिव राइटर्स के साथ काम – ताकि गानों में यूनिक और ताज़गी भरे बोल मिलें।
2. मॉडर्न म्यूज़िक टच – सैडनेस के साथ मेलोडिक बीट्स और मॉडर्न साउंड को मिलाना।
3. डिजिटल मार्केटिंग स्ट्रॉन्ग करना – रील्स, इंस्टा प्रमोशन और फैन एंगेजमेंट पर जोर देना।
4. फैंस से इमोशनल कनेक्ट – लाइव सेशन, बिहाइंड द सीन्स वीडियो और इंटरैक्शन से फैंस का भरोसा दोबारा जीतना।
5. नई स्टोरीलाइन – सिर्फ टूटे दिल की कहानियों से हटकर “सामाजिक इमोशन” वाले गाने भी ट्राई करना।
निष्कर्ष :
नीलकमल सिंह ने अपने करियर में वो मुकाम पाया है, जहाँ बहुत कम लोग पहुँचते हैं।
लेकिन हर कलाकार को बदलते वक्त और दर्शकों के स्वाद के अनुसार अपनी कला में बदलाव करना पड़ता है।
अगर नीलकमल सिंह नए लिरिक्स, ताज़ा म्यूज़िक और स्मार्ट मार्केटिंग के साथ दोबारा मैदान में उतरते हैं, तो यकीनन वह फिर से “सैड सॉन्ग्स के किंग” कहलाएँगे।
भोजपुरी इंडस्ट्री में उनके फैंस आज भी उन्हें उसी दर्दभरे अंदाज़ में सुनना चाहते हैं – बस उन्हें सही दिशा में दोबारा शुरुआत करनी होगी।


