राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार 2025 का खास लम्हाभारतीय सिनेमा के इतिहास में मंगलवार का दिन बेहद खास रहा, जब 71वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में मलयालम सिनेमा के दिग्गज अभिनेता मोहनलाल को भारत सरकार की ओर से सिनेमा का सबसे बड़ा सम्मान, दादासाहब फाल्के अवॉर्ड प्रदान किया गया।
नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित इस भव्य समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मोहनलाल को यह प्रतिष्ठित अवॉर्ड देकर सम्मानित किया। इस दौरान पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
क्यों खास है यह सम्मान?
दादासाहब फाल्के अवॉर्ड भारतीय सिनेमा का सर्वोच्च सम्मान है।इसे भारतीय फिल्मों के जनक दादा साहब फाल्के की याद में दिया जाता है।अब तक यह सम्मान सिर्फ चुनिंदा और महान कलाकारों को ही मिला है।
मोहनलाल का नाम इस लिस्ट में जुड़ना, न केवल उनके करियर के लिए बल्कि पूरे मलयालम सिनेमा के लिए गौरव का क्षण है।मोहनलाल की भावुक स्पीच ने जीता दिलअवॉर्ड लेते ही मोहनलाल ने मंच से जो स्पीच दी, उसने हर किसी का दिल छू लिया।
उनकी बातें आज सोशल मीडिया पर वायरल हो चुकी हैं और लोग बार-बार इसे सुन रहे हैं। मोहनलाल ने कहा – “आज इस मंच पर खड़े होकर मैं गर्व और गहरी कृतज्ञता महसूस कर रहा हूं।
दादा साहब फाल्के पुरस्कार, जो भारतीय सिनेमा के पितामह के नाम पर भारत सरकार द्वारा दिया जाता है, प्राप्त करना मेरे लिए अविश्वसनीय सम्मान है।”उन्होंने इस सम्मान को सिर्फ व्यक्तिगत नहीं बल्कि पूरे मलयालम फिल्म उद्योग की उपलब्धि बताया। मोहनलाल ने कहा – “यह अवॉर्ड मेरे लिए ही नहीं बल्कि मलयालम सिनेमा की पूरी रचनात्मक विरासत के लिए है। मैं गर्व से कह सकता हूं कि इस सम्मान को पाने वाला मैं अपने राज्य से दूसरा व्यक्ति हूं और मलयालम फिल्म इंडस्ट्री का सबसे युवा प्रतिनिधि हूं।
स्पीच क्यों हो रही है वायरल?
मोहनलाल की स्पीच को लोग इसलिए पसंद कर रहे हैं क्योंकि उन्होंने इसमें व्यक्तिगत उपलब्धियों से ज्यादा इंडस्ट्री, संस्कृति और कला की सामूहिक सफलता पर जोर दिया।उनकी सादगी और भावनाओं से भरी बातें हर पीढ़ी के दर्शकों को जोड़ रही हैं।
मोहनलाल का करियर – भारतीय सिनेमा की एक महान यात्रामोहनलाल ने अब तक 300 से ज्यादा फिल्मों में काम किया है।वे मलयालम सिनेमा के साथ-साथ तमिल, तेलुगु और हिंदी फिल्मों में भी अपनी छाप छोड़ चुके हैं। उन्हें पहले भी 5 राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और कई अंतरराष्ट्रीय अवॉर्ड्स मिल चुके हैं।
2001 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री और 2019 में पद्म भूषण से सम्मानित किया। मलयालम इंडस्ट्री के लिए ऐतिहासिक पलमलयालम फिल्म इंडस्ट्री हमेशा से अपनी कहानी-कथन, यथार्थवादी सिनेमा और दमदार एक्टिंग के लिए जानी जाती रही है।
आने वाली पीढ़ियों को इसे और ऊंचाइयों तक ले जाना है।”उनकी ये बातें हर उस कलाकार और दर्शक के लिए प्रेरणा हैं, जो भारतीय सिनेमा को दिल से प्यार करते हैं।
निष्कर्ष :
मोहनलाल का दादासाहब फाल्के अवॉर्ड जीतना सिर्फ उनका व्यक्तिगत सम्मान नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा की विविधता, समृद्धि और शक्ति का उत्सव है।
उनकी स्पीच ने यह साबित कर दिया कि एक सच्चा कलाकार अपनी सफलता को अकेले का सफर नहीं मानता, बल्कि पूरी इंडस्ट्री की साझी उपलब्धि मानता है।
आज मोहनलाल सिर्फ मलयालम सिनेमा ही नहीं बल्कि पूरे भारतीय सिनेमा के गौरव बन चुके हैं।


